बचेली, जिला दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़): नगर कीर्तन, निशान सेवा और लंगर का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न

बचेली, जिला दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़): नगर कीर्तन, निशान सेवा और लंगर का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न
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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के बचेली नगर में बीते दिन नगर कीर्तन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। गुरू घर में हुई इस धार्मिक यात्रा ने पूरे नगर में एकता, सेवा और श्रद्धा का संदेश फैलाया। नगर कीर्तन के दौरान गुरबाणी की मधुर ध्वनियाँ गूंजती रहीं और संगत ने जयकारे लगाकर वातावरण को पवित्र कर दिया।

नगर कीर्तन की अगुवाई पंच प्यारों ने की और संगत ने बड़ी श्रद्धा के साथ गुरू ग्रंथ साहिब के चल रहे पालकी साहिब का अनुसरण किया। नगर कीर्तन मार्ग को फूलों से सजाया गया और श्रद्धालुओं ने रास्ते भर अरदास कर गुरू की कृपा का धन्यवाद किया।

आज कार्यक्रम के दूसरे दिन निशान साहिब की सेवा की गई। संगत ने एकजुट होकर गुरूद्वारे के निशान साहिब को नया चोला चढ़ाया। इसके बाद अरदास की गई, जिसमें सभी ने देश-प्रदेश में अमन-चैन और भाईचारे की प्रार्थना की। गुरू घर में सेवा भाव से जुड़ने वाले सभी स्वयंसेवकों ने सफाई, चोला बदलने, और आयोजन की तैयारियों में दिन-रात योगदान दिया।

अरदास के उपरांत गुरू का लंगर बरताया गया। इसमें बचेली नगर और आसपास के क्षेत्रों से आई संगत ने बड़ी श्रद्धा से भाग लिया। लंगर में सभी के लिए समान रूप से स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई थी। संगत ने लंगर का प्रसाद ग्रहण कर गुरु नानक देव जी के ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ के उपदेश को आत्मसात किया।

इस अवसर पर स्थानीय गुरुद्वारा समिति के सदस्यों ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से समाज में भाईचारे, प्रेम और सेवा की भावना को और बल मिलता है। संगत ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए तन-मन-धन से सेवा की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने गुरू घर में अपना योगदान दिया।

कार्यक्रम के दौरान नगर में शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों ने उत्कृष्ट प्रबंधन किया। विशेष रूप से बचेली पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था में सहयोग प्रदान किया।

इस पूरे आयोजन की जानकारी सुखविंदर सिंह द्वारा दी गई, जिन्होंने बताया कि बचेली में हर वर्ष इस प्रकार के धार्मिक आयोजन किए जाते हैं ताकि नई पीढ़ी को गुरमत, सेवा और संगत के महत्व से परिचित कराया जा सके। उन्होंने कहा कि “गुरू घर की सेवा का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता, संगत की एकता और श्रद्धा ही सच्ची ताकत है।”

गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने सभी श्रद्धालुओं, प्रशासनिक अधिकारियों और स्वयंसेवकों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने का आश्वासन दिया।

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