बचेली में सिख समाज ने श्रद्धा और भाईचारे के साथ मनाया लोहड़ी का पावन पर्व

The Sikh community in Bacheli celebrated the holy festival of Lohri with reverence and brotherhood
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आज बचेली में सिख समाज की ओर से लोहड़ी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आपसी भाईचारे के वातावरण में मनाया गया। यह पर्व केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सभी धर्मों के लोगों ने अपने-अपने परिवारों सहित इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का आयोजन गुरुद्वारा साहब परिसर में किया गया, जहाँ सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया था। सबसे पहले गुरुद्वारा साहब में सर्व धर्म समभाव की भावना के साथ सरबत के भले के लिए विशेष अरदास की गई। इस अरदास में देश-दुनिया की सुख-शांति, आपसी प्रेम, भाईचारा और मानव कल्याण की कामना की गई। अरदास के दौरान पूरा वातावरण आध्यात्मिक शांति और श्रद्धा से ओत-प्रोत नजर आया।

अरदास के उपरांत परंपरा के अनुसार लोहड़ी जलाई गई। लोहड़ी की पवित्र अग्नि के चारों ओर सिख समाज के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी एकत्र हुए और अग्नि में रेवड़ी, मूंगफली, तिल और अन्य पारंपरिक सामग्री अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक गीतों और खुशियों के बीच लोगों ने एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाइयाँ दीं।

इस अवसर पर सिख समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सहयोग और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ते हैं। गुरुद्वारा साहब में आए सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और लंगर की भी व्यवस्था की गई, जिसमें सभी लोगों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानवता की सेवा और समाज में शांति स्थापित करना है। बचेली में मनाई गई यह लोहड़ी इसी भावना को मजबूत करती नजर आई, जहाँ धर्म, जाति और वर्ग से ऊपर उठकर लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियाँ साझा कीं।

इस पूरे आयोजन की जानकारी सुखविंदर सिंह जी की ओर से दी गई। उन्होंने सभी सहयोगियों, संगत और स्थानीय लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से सामाजिक एकता और भाईचारे को और मजबूत किया जाएगा।

कुल मिलाकर, बचेली में मनाया गया लोहड़ी का यह पावन पर्व धार्मिक सौहार्द, सांस्कृतिक विरासत और आपसी प्रेम का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

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